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आईटी डिपार्टमेंट का खुलासा, नोटबंदी के बाद ऐसे छिपाया गया कालाधन

नवंबर 2016 में सरकार की ओर से नोटबंदी के बाद अघोषित धन की तलाश में की गई कार्रवाई से नया खुलासा हुआ है. इस खुलासे में पता चला है कि लोगों ने ब्लैक मनी ऐसी जगहों पर लगाया है, जिसका पता लगाना सरकार के लिए बहुत कठिन हो जाता.
दरअसल, नोटबंदी के बाद देश में अघोषित धन की तलाश में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से की गई कार्रवाई से खुलासा हुआ है कि देश में नोटबंदी के बाद बहुत सारा कालाधन गोल्ड ज्वेलरी और फर्जी कंपनियों में इनवेस्ट कर छिपाया गया. इनकम टैक्स ऑफिसर्स कहना है कि ब्लैक मनी रखनेवालों ने अपनी रकम बैंकों में जमा नहीं की, क्योंकि वे अपनी पहचान जाहिर नहीं करना चाहते थे. ऑफिसर्स के मुताबिक उन्होंने कई ज्लेवर्स कारोबारियों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर सोने की खरीदारी की और अपने अघोषित धन को सोने में बदल दिया.
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की इन्वेस्टिगेशन का हिस्सा रहे एक ऑफिसर ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया, “8 नवंबर को नोटबंदी के बाद आभूषण व्यापारियों से बड़ी मात्रा में स्वर्ण आभूषण खरीदे. व्यापारियों ने बिक्री की रकम को अलग-अलग कर असली खरीदारों की पहचान छुपाई.”
वे कहते हैं- नोटंबदी आभूषण व्यापारियों के लिए अच्छा अवसर लेकर आई. चूंकि दो लाख रुपए के आभूषण खरीद पर पैन कार्ड अनिवार्य नहीं है, इसलिए व्यापारियों ने काले धन से खरीदे गए आभूषणों को दो-दो लाख से कम रुपए के कई बिल में बांट दिए. उन्होंने खरीदारों की जो सूची विभाग को दी थी, वह फर्जी निकली.
सेनको गोल्ड लि. जो इनकम टैक्सम डिपार्टमेंट मॉनिटरिंग में है, उसके प्रेसिडेंट व और मैनजिंग डायरेक्टर शंकर सेन ने बताया, “हम कस्टमर की ओर से दिए गए नाम और पते के आधार पर सभी ग्राहकों का हिसाब रखते हैं. हम अधिकारियों के साथ सहयोग कर रहे हैं और सभी जरूरी दस्तावेज मुहैया करा रहे हैं, जिसमें हमारे पास के सीसीटीवी फुटेज भी शामिल हैं.”
ऑफिसर्स के मुताबिक, नोटबंदी के बाद भारी मात्रा में नकदी नकली कंपनियों (शेल कंपनियों) में लगाया गया. इन कंपनियों के डमी निदेशक के रूप में अधिकारियों को एक कैंसर का मरीज भी मिला, जिसे इसके एवज में 10,000 रुपये मंथली या हर साइन पर 200 रुपए का भुगतान किया जाता था. शेल कंपनियों द्वारा बड़ी मात्रा में शेयर भी खरीदने की जानकारी मिली. अधिकारी ने बताया, “हमें ऐसी कंपनियों द्वारा भारी मात्रा में शेयर खरीदने के दस्तावेज मिले हैं, जिसके असल लाभार्थी को वास्तव में ये शेयर मिले हैं.”

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