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Anand hospital : आनंद हाॅस्पिटल की लापरवाही से जाते-जाते बची इन्कम टैक्स कमिश्नर के पिता की जान और सील हो गया…

मेरठ : मेडिकल थाना क्षेत्र स्थित आनंद हाॅस्टिपल के स्टाॅफ की लापरवाही से इन्कम टैक्स कमिश्नर के पिता की जान पर बन आई। जिसके बाद डीएम बुलंदशहर द्वारा काॅल करने पर मेरठ के जिलाधिकारी ने ड्रग इंस्पेक्टर को टीम के साथ मौके पर भेजा तो हाॅस्पिटल में महंगी दवाइयों के नाम पर मरीजों की जान के साथ किए जा रहे खिलवाड़ की असलियत सामने आ गई। टीम ने संदिग्ध इंजेक्शनों को सील करते हुए जांच के लिए लेब में भेज दिया है। वहीं पीड़ितों ने पूरे हाॅस्पिटल को सील किए जाने की मांग करते हुए जमकर हंगामा किया। देर रात तक ड्रग इंस्पेक्टर सहित पूरी टीम मौके पर जांच में जुटी थी। दरअसल, बुलंदशहर निवासी धर्मवीर को छाती में तकलीफ के चलते परिजनों द्वारा सोमवार को आनंद हाॅस्पिटल में भर्ती कराया गया था। धर्मवीर के पुत्र इन्कम टैक्स विभाग में कमिश्नर बताए जाते हैं। हाॅस्पिटल के 108 नंबर कमरे में भर्ती धर्मवीर को मंगलवार की शाम हाॅस्पिटल के स्टाॅफ द्वारा एक इंजेक्शन लगाने का प्रयास किया गया। आरोप है हाॅस्पिटल के मेडिकल स्टोर से खरीदा गया यह इंजेक्शन पानी में डिजाल्व न होने पर दूसरा इंजेक्शन मंगाया गया, लेकिन वह हाथ में लेते ही फूट गया। इसके बाद तीसरा इंजेक्शन खुला ही नहीं, जिसके बाद मरीज के तीमारदारों ने हाॅस्पिटल के स्टाॅफ को आड़े हाथ ले लिया। उन्होंने हाॅस्पिटल में नकली इंजेक्शन बेचे जाने का आरोप लगाते हुए हंगामा खड़ा कर दिया। सूत्रों के अनुसार मरीज के पुत्र ने मामले की जानकारी डीएम बुलंदशहर को दी। इन्कम टैक्स कमिश्नर के पिता से जुड़ा मामला होने के चलते मेरठ डीएम को तत्काल घटना से अवगत कराया गया। जिसके बाद मेरठ डीएम के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ड्रग इंस्पेक्टर संदीप चौधरी के नेतृत्व में आनंद हाॅस्पिटल पहुंची। बताया जाता है कि टीम के सामने भी उक्त कंपनी के इंजेक्शन पानी में डिजाल्व नहीं हुए। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने हाॅस्पिटल के मेडिकल स्टोर पर मौजूद उक्त इंजेक्शनों के सारे स्टाॅक को सील करते हुए सेंपलिंग के लिए भेजने को रख लिया। वहीं मरीज के परिजनों ने हाॅस्पिटल के स्टाॅफ पर मरीज की जान के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया और हाॅस्पिटल सील करन की मांग करते हुए हंगामा खड़ा कर दिया। देर रात तक स्वास्थ्य विभाग की टीम आनंद हाॅस्पिटल मंे सेंपलिंग में जुटी थी। वहीं हाॅस्पिटल के मीडिया प्रभारी मुनीश पंडित ने बताया कि उक्त इंजेक्शन कंपनी से खरीदे जाते हैं, जिसके बिल इत्यादी भी हाॅस्पिटल के पास हैं। उन्होंने इस पूरे प्रकरण में इंजेक्शन बनाने वाली कंपनी को दोषी बताते हुए बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सेंपलिंग कर ली है, आगे की कार्यवाही वही तय करेंगे। हाॅस्पिटल प्रबंधन हर प्रकार की जांच के लिए तैयार है।  

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